संजौली में नुक्कड़ नाटक के जरिए वोट चोरी और एसआईआर के खिलाफ उठाई आवाज, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग
शिमला। इंडिया ब्लॉक के आह्वान पर 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली विशाल रैली की तैयारियों के तहत सीपीआईएम जिला कमेटी शिमला ने बुधवार को संजौली चौक पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, कथित वोट चोरी और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। हिमाचल लोक संस्कृति मंच के माध्यम से प्रस्तुत इस नुक्कड़ नाटक के जरिए आम जनता को मताधिकार की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
इसके बाद आयोजित नुक्कड़ सभा में सीपीआईएम के राज्य सचिव संजय चौहान, जिला सचिव विजेंद्र मेहरा सहित पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान पार्टी वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने, इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों के नाम दोबारा शामिल करने और निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्वायत्तता बहाल करने की मांग उठाई।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर टिकी है। प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची में शामिल करना और मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में बड़े स्तर पर बदलाव और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर देशभर में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर न हो।
उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो इसके लिए पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। संबंधित नागरिक को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। प्रशासनिक जटिलताओं और दस्तावेजों की कमी के कारण किसी भी पात्र नागरिक को उसके संवैधानिक मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने मतदाता सूची से हटाए गए सभी पात्र मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल करने की मांग की।
सभा में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग को किसी भी राजनीतिक दल या सरकार के प्रभाव से स्वतंत्र होकर काम करना चाहिए। आयोग की विश्वसनीयता लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास से जुड़ी है और इसे मजबूत करने के लिए पारदर्शिता तथा जवाबदेही जरूरी है।
वक्ताओं ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि चयन व्यवस्था में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना था कि नियुक्तियों की प्रक्रिया स्वतंत्र और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कायम रहे।
सीपीआईएम नेताओं ने निर्वाचन आयोग के भीतर मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और एसआईआर से संबंधित निर्णयों को लेकर आयुक्तों की कथित आपत्तियों की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की रक्षा से जुड़ा है।
पार्टी नेताओं ने लोगों से 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली इंडिया ब्लॉक की रैली में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए व्यापक जनभागीदारी जरूरी है।
इस दौरान फाल्मा चौहान, जगमोहन ठाकुर, सत्यवान पुंडीर, राम सिंह, अनिल ठाकुर, सन्नी सिकटा, डॉ. प्रवीण जरेट, रंजना जरेट, रंजीव कुठियाला, पवन, प्रवेश, अंशुल, कृतिका, स्नेहा, वैशाली, संदीप वर्मा, सुमित्रा चंदेल, उमा, चंपा और निशा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
