ग्रांट-इन-एड के माध्यम से आते हैं 14942 करोड़ रुपए, केंद्र हिमाचल प्रदेश के कुल बजट का 50 फीसदी प्रतिशत हिस्सा भेजता है
हिमाचल को 2023 एवं 2024 में 24317 करोड़ केंद्र से प्राप्त हुए
शिमला। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा है कि जीएसटी में हुए बदलाव से हिमाचल प्रदेश को एक पैसे का भी घाटा नहीं होगा। उन्होंने दावे के साथ कहा कि हिमाचल प्रदेश को जीएसटी एवं आईजीएसटी से प्रतिवर्ष आय में 14 फीसदी प्रतिशत की वृद्धि होगी। वे सोमवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे।
अग्रवाल ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि अगर वित्त वर्ष 2023-2024 की बात करें तो प्रदेश के जीएसटी के हिस्से के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को 5339 करोड़ रुपए और आईजीएसटी के हिस्से से 2845 करोड़ रुपए आए हैं। अगर इनका कुल जोड़ लगाया जाए तो 9375 करोड़ रुपए हिमाचल प्रदेश को जीएसटी के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। उन्होंने ग्रांट इन एड का हवाला देते हुए कहा कि 2023 एवं 2024 में केंद्र से हिमाचल प्रदेश को 14942 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, इसका मतलब 1 वर्ष में हिमाचल प्रदेश को केंद्र से 24317 करोड़ रुपए आए और हिमाचल प्रदेश का कुल बजट 50000 करोड़ रुपए का है। यानी, केंद्र से हिमाचल प्रदेश को कुल बजट का 50 फीसदी हिस्सा प्राप्त हो रहा है। अगर उसके बाद भी हिमाचल सरकार और कांग्रेस के नेता पैसों का रोना रो रही है तो हिमाचल सरकार और कांग्रेस ही इस बात का जवाब दे। केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है हिमाचल सरकार और कांग्रेस केवल मात्र एक नकारात्मक नॉरेटिव सेट करने का प्रयास कर रही है।
अग्रवाल ने कहा कि 2020 एवं 2021 में हिमाचल प्रदेश को 4753 करोड़ रुपए, 2021 एवं 2022 में 7349 करोड़ रुपए और 2022 एवं 2023 में 7883 करोड़ रुपए जीएसटी के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। यह छोटी राशि नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल मात्र यह कहना कि हिमाचल प्रदेश को जीएसटी से घाटा हो रहा है, सत्य का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वेतन पर 39 फीसदी, पेंशन पर 23 फीसदी और ब्याज पर 15 फीसदी का खर्चा हो रहा है, केवल केंद्र को दोष देने से सत्य बदल नहीं जाएगा।
भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती एवं गति प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि 2017 में जब जीएसटी कर प्रणाली लागू की गई थी, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की आर्थिक आज़ादी का दिन बताया था। “एक राष्ट्र, एक कर” की व्यवस्था ने भारत की एकता और अखंडता को सशक्त आधार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें जीएसटी लागू करने में सफल नहीं हो सकीं, जबकि मोदी सरकार ने प्रदेशों को 14 फीसदी वार्षिक क्षतिपूर्ति का भरोसा देकर सभी राज्यों और केंद्र के करों को समाहित कर एक सफल कर व्यवस्था लागू की। उन्होंने बताया कि आज देश में प्रति माह औसतन 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कर प्राप्ति हो रही है और जीएसटी तकनीकी रूप से सरल और व्यापक रूप से लागू हो चुका है।
