शिमला। आईजीएमसी व दंत चिकित्सालय कर्मचारी महासंघ के प्रधान हरिद्र सिंह मैहता, महामंत्री हनिश ठाकुर, कोषाध्यक्ष अरविंद पाल की अगुवाई में महासंघ पदाधिकारियों ने बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल से मुलाकात की। इस मलाकात के दौरान संघ ने आईजीएमसी व दंत चिकित्सालय की समस्याओं का उनके समक्ष रखा। इस मीटिंग में विशेष तौर पर पैरामेडिकल की बन्द पड़ी समर व विंटर वेकेशन को बहाल करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस विषय पर संघ के प्रधान हरिद्र सिंह मैहता ने कहा कि इन छुट्टियों को पिछले कुछ सालों से बन्द करने का कोई भी औचित्य नहीं बनता था। यह छुट्टियां उन्हें उस समय से दी जा रही थी, जब से इस मैडिकल कालेज की स्थापना हुई है। अब छुट्टियां बंद होने से ये कर्मचारी अपनेआप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पूर्व आईजीएमसी में एलाईड हेल्थ केयर कांउसिल के कार्यक्रम में भी यह मुद्दा संघ द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष रखा था, जिसे उन्होंने बड़ी गम्भीरता से सुनते हुए स्वास्थ्य मंत्री को संघ के पक्ष में बात रखते हुए उसे बहाल करने की बात कही थी।
मैहता ने कहा कि उन्होंने रोगी कल्याण समिति में बचे बाकी कर्मचारियों को पिछले कर्मचारियों की भांति रेगुलर पे स्केल देने की बात भी रखी, जिसमें संघ ने जल्द से जल्द हेल्थ सेकेट्ररी से मीटिंग करने का आग्रह किया। ये कर्मचारी काफी समय से आईजीएमसी में भिन्न-भिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं व रोगी कल्याण मे अपनी 8 सालों की शर्तों को पूरा करने के बाद से पिछले डेढ़ साल से अपनी बढ़ने वाली सैलरी का इंतजार कर रहे हैं। यह कर्मचारी सिर्फ 9200 रुपए प्रति माह से अपने घर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
मैहता ने कहा कि वे यह मुद्दा प्रदेश के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्र, शिमला के विधायक हरीश जनारथा प्रिन्सिपल एडवाइजर (मीडिया) नरेश चौहान व मुख्यमंत्री के ओएसडी रितेश कपरेट के समक्ष पहले ही रख चुके हैं। मैहता ने कहा कि उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से पूर्ण आशा है कि वह इन कर्मचारियों को दुख दर्द को अवश्य समझेंगे व राहत देंगे। जैसे हाल ही में एक कार्यक्रम में अनुबंध पैरामेडिकल कर्मचारियों की सैलरी 10 हजार से 20 हजार करने की घोषणा की थी, जिसके लिए आईजीएमसी व दंत चिकित्सालय कर्मचारी संघ उनका धन्यवाद करता है।
