शिमला। सीटू राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन किया है। सीटू की राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर पुलिसकर्मियों के शोषण का आरोप लगाया है। राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपए के बजाए 10300 रुपए संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को अविलंब पूर्ण किया जाए।सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने बुधवार को यहां प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। इस बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। सबसे मुश्किल ड्यूटी करने वाले व 24 घंटे ड्यूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं हैं।
सीटू नेताओं ने कहा कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो 24 घंटे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है। थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपए का खर्चा अपनी जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल 210 रुपए महीना है, जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपए से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपए बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आवंटित राशि से भी कम है।
मेहरा व गौतम ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है, परन्तु कस्टडी कक्षों, बाथरूमों, बैरकों, स्टोरों, मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इस सबसे पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं। पुलिस में स्टाफ बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किए गए हैं, जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। रिलीवर तक नहीं हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला तक के कुछ थानों के पास अपनी गाड़ी तक नहीं है। वे निरन्तर ओवरटाइम ड्यूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इससे प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में 10 से 12 हज़ार रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग 90 साप्ताहिक अवकाश, सेकेंड सैटर-डे, राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है। सीटू नेताओं ने चिंता व्यक्त की कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के 15 साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है, परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किए जा रहे हैं, जिसमें एक दिन ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कांस्टेबल से एएसआई बनने के लिए 17 से 20 वर्ष भी लग जाते हैं।
